हर तरफ बर्बादी के निशान, किसान भी नही बच पाया जल सेलाब से

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सांगोद ( कोटा )
भीमसागर बांध के गेट खोलने से बरसों बाद पहली बार रोद्र रूप में आई उजाड़ नदी की बाढ़ किसानों के लिए भी वज्रपात जैसी साबित हुई। हर तरफ बर्बादी के निशान नजर आ रहे है खेतों में अंकुरित फसलें तो पानी भराव से तबाह हो गई लेकिन जिन किसानों ने घर एवं खलिहानों में उपज का भंडारण कर रखा था वो भी बाढ़ में बह गई।

किसानों को उम्मीद थी की अच्छे भाव आएंगे तो उपज को बेचकर कर्जा चुकाने के साथ ही बेटे-बेटियों के हाथ पीले करेंगे। घर खर्च में भी उपज काम आएंगी। लेकिन किसानों की सारी उम्मीदे एक झटके में टूट गई। 


खेत एवं खलिहानों के साथ घरों में भरी सारी उपज बाढ़ के पानी में भीग गई। मकानों में भरी उपज तो बच गई, जिसे किसान सूखाकर बेचने लायक स्थिति में लाने की जुगत कर रहे है लेकिन खेतों में बने अस्थाई भंडारण कक्षों में भरी लाखों रुपए की सारी उपज बाढ़ के पानी में इधर-उधर बह गई।

हाडोती न्यूज़ ने ऐसे कई किसानों से उनकी पीड़ा जानने की कोशिश की, जिनकी सारी उपज बाढ़ के पानी के साथ बह गई। बातचीत में कई किसानों की आंखों नम हो गई तो कई किसान वर्षभर की मेहनत की उपज बरबाद होने से चिंतित दिखे।


सांगोद में 6 अगस्त को उजाड़ नदी में आई भीषण बाढ़ का पानी तो उतर गया, लेकिन बर्बादी का मंजर ऐसा छोड़ गया जिसे लोग सालों तक नही भूल सकते। बाढ़ से खेतों में सारी फसलें तबाह हो गई। खेतों में बचा है तो हर तरफ सिर्फ बरबादी का मंजर।

उंचाई वाले खेतों में जरूर थोड़ी बहुत फसलें सुरक्षित बची है लेकिन जयादातर खेतों में पानी भराव से किसानों की सारी फसलें खराब हो गई। अब भी कई जगहों पर दूर-दूर तक खेतों में पानी भरा हुआ है। जिन खेतों में फसलें सुरक्षित रही वहां भी पौधों में फलियां नहीं बनने से किसान चिंतित है। 


अच्छे भाव की थी उम्मीद
क्षेत्र में लहसुन उत्पादक कई किसानों ने अपनी उपज को खेत एवं घरों में भंडारण कर रखा था। उम्मीद थी की अ’छे भाव आएंगे तो थोड़ा जयादा फायदा होगा। लेकिन विधाता को इस बार कुछ अलग ही मंजूर था। अ’छे भाव मिलने की जगह किसानों की लागत भी उनके हाथ नहीं आई। घरों पर रखी उपज पानी में भीगकर खराब हो गई तो खेतों में बाढ़ का पानी सारी उपज को बहाकर ले गया। अब बची है तो सिर्फ चिंता। बाढ़ के पानी से बची फसलों को अब किसान सूखाकर बेचने लायक स्थिति में ला रहे है ताकि थोड़ा बहुत पैसा तो मिल सके। 5 से 7 हजार रुपये क्विंटल में बिकने वाली उपज ओने पोने दाम मिल रहे है। जिससे फायदा तो दूर लागत भी नही मिल रही

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