कोटा
शहर के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक गंभीर चिकित्सकीय मामला सामने आया है। यहां सीजेरियन (ऑपरेशन) डिलीवरी के बाद 6 प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इनमें से एक महिला की मौत हो चुकी है, जबकि 5 अन्य एसएसबी ब्लॉक के नेफ्रोलॉजी आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं। घटना के बाद से नवजात बच्चे रिश्तेदारों की गोद में बिलख रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
4 घंटे बाद ही बिगड़ने लगी तबीयत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 4 मई को अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में 12 महिलाओं की सीजेरियन डिलीवरी हुई थी। इनमें से 6 प्रसूताओं की स्थिति ऑपरेशन के महज 4 घंटे बाद बिगड़ने लगी। मरीजों का ब्लड प्रेशर कम होने लगा, प्लेटलेट्स गिरने लगीं और यूरिन आना बंद हो गया। मंगलवार (5 मई) सुबह जब एक प्रसूता (पायल) की मौत हो गई, तब जाकर अस्पताल का स्टाफ और डॉक्टर हरकत में आए। आनन-फानन में अन्य 5 महिलाओं को रातों-रात एसएसबी ब्लॉक के नेफ्रो आईसीयू में शिफ्ट किया गया। इनमें से ज्योति नामक महिला की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

परिजनों के गंभीर आरोप: “रात में जांच से किया इनकार, पैदल ले जाना पड़ा वार्ड”
अस्पताल के आईसीयू के बाहर का नजारा बेहद हृदयविदारक है। इटावा की रागिनी (29), काकरिया की चंद्रकला (30) और संजय नगर की धन्नी (32) सहित अन्य भर्ती महिलाओं के परिजन नवजातों को गोद में लिए उनके रोने को शांत करने का प्रयास कर रहे हैं। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर भारी लापरवाही का आरोप लगाया है:
रागिनी के पति लोकेश ने बताया: 4 मई दोपहर डिलीवरी के बाद शाम से ही रागिनी का यूरिन आना बंद हो गया था। बार-बार शिकायत करने पर भी डॉक्टर्स ने टालमटोल की। रात 2 बजे जब यूरिन जांच के लिए सैंपल लेकर लैब गए, तो कर्मचारियों ने यह कहकर मना कर दिया कि जांच सुबह ही होगी। इमरजेंसी में भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
चंद्रकला के पति राकेश ने बताया: तबीयत खराब होने और किडनी में इंफेक्शन का पता चलने के बाद, मंगलवार रात गंभीर हालत में मरीज को एसएसबी वार्ड तक पैदल ही लेकर जाना पड़ा।
विशेषज्ञों का मत: सर्जरी नहीं, दवा या फ्लूड हो सकते हैं कारण
एक साथ इतनी महिलाओं की किडनी पर असर होने के मामले में गायनिक विशेषज्ञ डॉ. रितिका माथुर का कहना है कि ये लक्षण सीधे तौर पर सर्जरी की जटिलता नहीं लगते। सीजेरियन से किडनी पर ऐसा दबाव नहीं पड़ता। बीपी लो होना और यूरिन रुकना मुख्य रूप से आईवी फ्लूड (ड्रिप) में किसी गड़बड़ी या एंटीबायोटिक दवाओं के रिएक्शन का परिणाम हो सकता है।
अस्पताल प्रशासन ने बनाई जांच कमेटी
मामले के तूल पकड़ने और जनप्रतिनिधियों के पहुंचने के बाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने जांच कमेटी गठित कर दी है।
डॉ. जैन ने बताया कि दवाओं और फ्लूड के सैंपल की जांच करवाई जाएगी।
मृतका पायल के मामले की जांच के लिए भी अलग से टीम बनाई गई है।
एहतियात के तौर पर संक्रमण की आशंका को देखते हुए गायनिक वार्ड को खाली करवाकर सैनेटाइज करवाया गया है।
प्रशासन का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता भर्ती 5 मरीजों की जान बचाना है, जिन्हें अगले तीन-चार दिन तक सघन निगरानी में रखा जाएगा क्योंकि वे अभी खतरे से बाहर नहीं हैं।





