कोटा
राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल अस्पताल (सरकारी अस्पताल) में सीजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन से प्रसव) के बाद प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले में गुरुवार को एक और महिला की मौत हो गई। इस गंभीर लापरवाही के चलते अब तक कुल दो प्रसूताओं की जान जा चुकी है। वहीं, गंभीर रूप से बीमार 4 अन्य महिलाओं को बेहतर इलाज के लिए जयपुर भेजने की तैयारी की जा रही है। गुरुवार को हुई दूसरी मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव लेने से इनकार कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
कोटा के न्यू मेडिकल अस्पताल के गायनिक वार्ड में सीजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। सभी महिलाओं का यूरिन पास होना बंद हो गया और उनकी किडनी फेल होने की स्थिति बन गई। इसके बाद सभी को एसएसबी (सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक) के नेफ्रोलॉजी आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों (सर्जन, एनेस्थीसिया, गायनिक, फिजिशियन, नेफ्रोलॉजी) का एक बोर्ड भी गठित किया था।
अब तक दो प्रसूताओं ने तोड़ा दम
इस घटना में सबसे पहले पायल नामक महिला की मंगलवार को मौत हो गई थी। पायल के नवजात बच्चे की देखभाल अब परिवार वाले कर रहे हैं और घर में मातम पसरा है। वहीं, गुरुवार सुबह करीब 10 बजे दूसरी प्रसूता ज्योति (20 वर्ष) की स्थिति क्रिटिकल होने पर उसे वेंटिलेटर पर लिया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ज्योति के पति रवि के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने मामले में गंभीर लापरवाही बरती है।
जांच के लिए जयपुर से पहुंची विशेषज्ञों की टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के निर्देश पर जयपुर से चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कोटा पहुंच गई है। इस टीम में:
डॉ. निहार शर्मा (निश्चेतना विभाग)
डॉ. सुनील कुमार महावर (मेडिसिन विभाग)
डॉ. पवन अग्रवाल (स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग)
डॉ. संजीव कुमार शर्मा (नेफ्रोलॉजी विभाग)
जिला कलेक्टर पीयूष समारिया ने भी गुरुवार सुबह अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि मामले की तकनीकी जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। ऑपरेशन के दौरान प्रयुक्त दवाओं और पूरी प्रक्रिया (प्रोटोकॉल) का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
मामले पर गरमाई राजनीति
इस दर्दनाक घटना पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए जाने के बाद, शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने पलटवार किया है। दिलावर ने कहा कि डोटासरा को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें हर जगह घोटाले ही नजर आते हैं।
गंभीर हालत में भर्ती अन्य 4 प्रसूताएं (जिन्हें जयपुर रेफर किया जा रहा है):
रागिनी (29) – पत्नी लोकेश मीणा, निवासी झाड़ोल, इटावा (कोटा)
सुशीला (35) – पत्नी ओमप्रकाश, बरडा बस्ती (कोटा)
चंद्र कला – पत्नी राकेश, काकरिया, करवार (कोटा)
धन्नी – पत्नी मोहन लाल, संजय नगर (कोटा)





